न्यास के द्वारा मंदिर पर वर्शभर मनाये जाने वाले महत्वपूर्ण उत्सव


बसंत पंचमी पर सर्वजातिय समूहिक विवाह आयोजन
माॅं सरस्वती के जन्मोत्सव वसंतपंचमी पर अबूझ मुहुर्त के अवसर पर निर्धन, अनाथ, विकलांग कन्याओं का कन्यादान बाबा अचलनाथ की कृपा से किया जाता है। दहेज की कुप्रथा के कारण निर्धन माता पिता अपनी बालिकाओं को गर्भ में ही नश्ट कर भ्रूण हत्या का पाप करते हैं। इस कुप्रथा को समाप्त करने के उद्देश्य से श्रीअचलेश्वर मंदिर द्वारा लगभग 30वर्श पूर्व यह अभियान चलाया गया और आव्हान किया गया कि कोई भी भक्त अपनी कन्या को बोझ न समझे बाबा अचलनाथ उन सभी कन्याओं का कन्यादान स्वयं कर विवाह आयोजन को सामूहिक रूप हरवर्श वसंतपंचमी के अवसर पर सम्पन्न करायें । मंदिर पर 1251 जोड़ों का एक प्रांगण में एक ही दिन विवाह सम्पन्न कराकर अचलेश्वर न्यास ने विश्व कीर्तिमान स्थापित किया। जिसमें विवाह के साथ वरवधु को ग्रहस्थी का आवश्यक सामान भेंट स्वरूप देकर जीवन की सफलता का आषीर्वाद दिया जाता है ।

श्री महाषिवरात्री- भगवान श्री अचलनाथ का विवाह उत्सव
ग्वालियर चम्बल संभाग भर से लाखों श्रृद्धालु नर नारी व बच्चे इस दिन उपवास रखकर भगवन श्री अचलनाथ पर अभिशेक,बेलपत्र फल पुश्प, एवं प्रसाद अर्पित कर श्रृद्धा आस्था रखते हैं । मंदिर पर विषेश श्रृंगार व्यवस्था,छप्पन भोग, व फलाहार प्रसादी ठण्डाई का वितरण होता है।
गुप्तेश्वर महादेव अपने भक्तों के साथ महाषिवरात्री मनाने के लिये अचेलेश्वर धाम पर पधारते हैं जिसमें अचलेश्वर न्यास द्वारा भगवान श्री गुप्तेश्वर की सवारी यात्रा का भव्य स्वागत व सत्कार किया जाता है।

सुरक्षा व्यवस्था में प्रषासन व मंदिर न्यासियों का सहयोग
भक्तों की भीड़ को देखते हुए समय समय पर मंदिर के बाहर के दरवाजे से भी यांत्रिक जलपात्र लगाकर जलाभिशेक दूध आदि चढाने की व्यवस्था बनाई जाती है। तथा सुरक्षा व यातायात नियंत्रण पूरे मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे स्थाई रूप से लगाये गये है ।

रंगपचमी यात्रा
सनातन हिन्दू संस्कृति के अनुसार उत्सव से उत्साह और उत्साह से उन्नति की और अग्रसर होने का मार्ग प्रषस्त होता है । इसी संकल्पना को लेकर भगवान अचलनाथ की पालकी सवारी भक्तों को फाग महोत्सव मनाने का आनंद लेते व देते हुए नगर के प्रमुख प्रमुख मार्गो से होते हुए मर्यादापुरूशोत्तम भगवान श्रीराम के मंदिर स्थित फालकाबाजार,गिरराज मंदिर हायकेार्ट, भगवान चक्रघर मंदिर श्री सनातनधर्ममण्डल रंगपंचमी अभीर गुलाल, चंदन इत्र के साथ फागोत्सव मनाया जाता है । इसमें नगर के श्रृद्धालजन भाग लेते है।

नवदुर्गा महोत्सव एवं हिन्दू नववर्श चैत्रप्रतिपदा
श्री अचलेश्वर न्यास द्वारा हिन्दू विक्रमसंवत् नववर्श चैत्र प्रतिपदा के दिन पंचाग पूजन तथा भारत के स्वदेषी नववर्श को धूमधाम से मनाकर सभी को हार्दिक षुभकामनायें तथा अपनी संस्कृति के संरक्षण एवं संस्कारों को आत्मसात् करने का संकल्प दोहराया जाता है। माॅं दुर्गा के नवरात्रि षक्ति महोत्सव का षुभारंभपूजा अर्चना के साथ सम्पन्न होता है।

रामनवमी रामजन्मोत्सव
श्री अचलेश्वर न्यास द्वारा भगवान मर्यादापुरूशोत्तम का रामजन्मोत्सव रामनवमी बड़े धूमधाम से चैत्र नवरात्री में मनाया जाता है।

श्री हनुमान जयंती
श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर द्वारा भगवान षिव के एकादष रूद्रस्वरूप श्री बजरंग बली राम भक्त श्री हनुमतलाल का जन्मोत्सव श्री रामचरित मानस के सुन्दरकाण्ड पाठ सुनाकर मनाया जाता है। चैला श्रृंगार व विषेश सजावट के साथ धूमधाम से मनाया जाता है ।

षिवपूजन श्रावण मास
आध्यात्मिक दृश्टि में संपूर्ण श्रावणमास को भगवान षिव की आराधनाके लिये सर्वश्रेश्ठ माना जाता है । पूरे श्रावणमास में श्री अचलेश्वर धाम पर हजारों महिला पुरूश दर्षन पूजन व उपवास के लिये विषेशकर प्रति सोमवार को आकर अपनी आस्था प्रकट करती है । नियमित पूरे मास षिव पर बैलपत्र व गंगाजल, पंचामृत व जलभिश्ेाक कर अपने जीवन को षिवमय बनाते है । हरिद्वार प्रयागराज, सौरोजी गंगौत्री यमनौत्री से लम्बी पैदल चलकर आई कावड़ियों की यात्रा द्वारा श्री अचलनाथ पर तीर्थ के पवित्र जल का अभिशेक किया जाता है जिन यात्रियों का स्वागत सत्कार अचलेश्वर न्यास के द्वारा किया जाता है ।

श्रावणमास के सोमवार को भगवान अचलनाथ की श्रावण नगर भ्रमण यात्रा
सर्वप्रथम श्रावणमास 2017 में श्रावण के सोमवार को उज्जैन महाकाल की तरह बाबा अचलनाथ को पालकी में सवारी कर नगर श्रावण भ्रमण यात्रा का षुभरांभ किया । जिसमें नगर के हजारो श्रृद्धालुजनों ने बढ़चढ़कर भाग लिसा आगामी इस यात्रा को श्रावण के प्रत्येक सोमवार को नगर के अलग अलग क्षेत्रों में निकालने का उपक्रम है ।

श्रीकृश्णजन्माश्टमी महोत्सव
श्री अचलेश्वर मंदिर पर भगवान श्रीकृश्ण का जन्माश्टमी महोत्सव बड़े ही श्रृद्धापूर्वक मनाया जाता है। इस अवसरपर भगवान अचलाथ को श्रीकृश्ण स्वरूप में श्रृगांरित कर मनमोहक दर्षन होते हैं । इस अवसर पर सुविख्यात चित्र विचित्र जैसे गायकों के भजन संध्या का आनंद ग्वालियर की जनता को दिलाया जाता है ।

श्री गणेष महोत्सव राश्ट्रभक्ति का बीजारोपण
गणेष महोत्सव के माध्यम से लोकमान्य बालगंगाधर तिलक ने श्री गणेष महोत्सव के माध्यम से तत्कालीन युवापीढ़ी में राश्ट्रभक्ति का बीजरोपण भारतवर्श में किया । उन्हीं संस्कारों के साथ श्री अचलेश्वर लोकन्यास द्वारा श्री गणेषजी की विषालकाय रिद्धी सिद्धि मूशकराज के साथ प्रतिमा मंदिर परिसर में विराजमान होती है और अनंत चैदस को मूर्ति का विषाल विसर्जन समारोह षहर भर में धूमता हुआ सागरताल पहुॅंचकर विसर्जनसम्पन्न होता है। पूरे प्रदेष के दर्षनार्थी इस महोत्सव में षामिल होकर आनंद अनुभव करते है ।

प्रस्तावित श्री अचलेश्वर मंदिर का पुनजीर्णोद्धार की योजना
दक्षिण भारत की नागर षैली में भौमिक स्वरूप में बनेगा अचलेश्वर मंदिर जिसमें मंदिरके चारों दिषाओं में यात्रिक चाॅंदी के जलपात्र होंगे जिनमें दूध, गंगाजल एवं अन्य पूजनसामग्री प्रथक प्रथक चढाई जाने के संकेत रहेंगें । ताकि भक्तों द्वारा षिव को अर्पित दुग्ध का अभिशेक एवं सदुपयोग किया जा सकेगा । कुछ दूध को षिवलिंग पर तथा बाकी बचे अधिकांषदूध को संचित पत्र में एकत्रित कर उसका जरूरतमंदों को वितरित किया जावेगा ।

ःः अन्य प्रकल्प:ः

मंदिर पर चढ़े फलों बेलपत्रों को खाद निर्माण में सहयोग
इस वर्श दिसम्बर 2015 के बाद मंदिर पर जो फूल चढ़ाये जाते थे उनका सदुपयोग हो इस दृश्टि न्यास द्वारा जैविक खाद सयंत्र को निःषुल्क प्रदान किया जाता है । भविश्य में इस प्लाण्ट का मंदिर प्रांगण में लगाने की योजना है ताकि संपूर्ण बेलपत्र फूल सामग्री का सदुपयोंग जैविक खाद बनाने में कर उसकी आमदनी से ट्रस्ट में लाभ होगा ।

श्री बाबा बचलनाथ का पवित्र मंदिर ग्वालियर एवं चम्बल संभाग भर के ही नहीं बल्कि देष विदेष भर में लोकप्रिय श्रृद्धा व अस्था का केन्द्र है। समय अनुकूल मंदिर भी पुर्नजीर्णोद्धार हेतु आवश्यक मजबूती चाहता है । क्योंकि मंदिर क लेण्टर्स बीम क्षतिग्रस्त होकर चटक रहे है जिससे कभी भी कोई अप्रिय घटना होने का अन्देषा बना हुआ है ।

न्यास की दो दो साधारण सभाओं की बैठकों में सर्वसम्मति से मंदिर के पुर्नजीर्णोद्धार करने का निर्णय स्वीकृत हो चुका है । इस निर्णय को कार्यरूप में परिणित करने हेतु दिनांक ............................ को षिला पूजन किया जायेगा ।
प्रस्तावित मंदिर के स्वरूप का छायाचित्र की प्रति श्री अचलेश्वर मंदिरपर श्रृद्धालुओं के दर्षन हेतु प्रदर्षित कर दिया है ।

न्यास की यह परिकल्पना इस मंदिर को पर्यटन के नक्षे में विषेश स्थान में साक्षात् स्वरूप प्रदान करेगी । जैसा कि अक्षरधाम मंदिर विभिन्न राज्यों में ख्यातिनाम व प्रतिश्ठा प्राप्त होकर दर्षनीय व पर्यटकों को आकर्शित करते है ।

न्यास का मुख्य उद्देश्य:-  सनातन हिन्दू धर्म संस्कृति एवं आध्यात्म तथा राश्ट्रभक्ति का संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु प्रचार प्रसार करना, गौसंरक्षण गौसंवर्द्धन तथा निरीह मूक पषुओं की सेवा व गरीब पीड़ित व रोगियों विकलांग की मानव सेवा तथा गरीब असहाय कन्याओं को न्यास का संरक्षण बिना किसी भेदभाव के प्रदान कर विवाह आयोजन संपादित करना।

।। सर्वभूत हिते रतः ।।

श्री अचलेश्वर महादेव सार्वजनिक लोकन्यास,ग्वालियर