मंदिर परिसर


महर्शि गालब की तपोभूमि ग्वालियर की गोद में अपने अचल स्वरूप में विराजमान देवाधिदेव अवधरदानी आषुतोश अखण्ड ब्राह्मण्ड नायक भगवान भोलेनाथ का यह प्राचीन षिव मंदिर चम्बल संभाग के असंख्य सनातनी हिन्दूओं की आस्था तथा श्रृद्धा का केन्द्र है । इस पवित्र षिवमंदिर में प्राकृतिक रूप से यानि भूगर्भ से स्वयं प्रगट हुए षिवलिंग की भूमि के अंदर की गहराई को मापने हेतु ग्वालियर के पूर्व षासकों द्वारा आसपास खुदाई कराने के बावजूद भी इसकी तह का अंत प्राप्त न हो सका और । षासक के निर्देषों अनुसार षिवलिंग की आसपास की गहरी खुदाई करने वाले तत्कालीन श्रमिकोें के अनुसार इस षिवलिंग की गहराई का स्पर्ष पाताललोक से संबंध रखता है ।
पूर्वजों द्वारा ऐसा भी बताया जाता है कि खुदाई के साथ साथ पवित्र षिवलिंग को जंजीरों से बाॅंधकर निज स्थान से अन्यत्र पहुॅंचाने के लिये हाथियों के बल का प्रयोग भी असफल रहा। तभी से यह पवित्र अचल षिवलिंग ‘‘अचलेष्वर महादेव’’ के नाम से विख्यात् हुआ, जिसका ग्वालियर ही नहीं बल्कि विष्वभर के देषों में ग्वालियर नगर के श्री अचलेष्वर महादेव मंदिर का गौरवपूर्ण इतिहास जाना व पहचाना जाता है।

भगवान् श्री अचलनाथ के मंदिर में विराजमान् षिवपरिवार
भगवान् श्री अचलनाथ के साथ मंदिर गर्भ गृह में माता पार्वती, नंदीष्वर, श्री गणेष जी एवं अलंकार रूप में श्री नागदेवता भी विराजमान् है। भक्तों के द्वारा पूजा अर्चना नियमित विद्वत ब्राह्मणों के माध्यम से जलागंगाभिशेक, दुग्धाभिशेक, पंचामृत रूद्राअश्टाध्यायी से पूजन एवं ढोल नगाड़ों डबरू विषाल घण्टों के वादन के साथ सुबह 7ः30बजे एवं षाम को 6ः30बजे महाआरती एवं सस्वर होती है । बाबा अचलनाथ की आरती के समय बजने वाले घण्टों की ध्वनि सुनने के लिये दूर दराज, देष विदेष - थायलेण्ड, अमेरिका, माॅरिसष आदि देषों में बसने वाले हिन्दू संस्कृति के भक्त परिवारजन फोन पर सुनने के लिये लालायित रहते हैं । जिसे सुनकर स्वयं को धन्य मानते हैं ।
श्री अचलेश्वर मंदिर के अंदर 8 स्तम्भ तथा चारों दिषाओं में चार दरवाजे हैं तथा मंदिर के स्तम्भों पर अर्द्धपरिक्रमा मार्ग में हिन्दू देवी देवताओं की आकर्शंक मूर्तियां विराजमान है जिनके दर्षन सभी श्रृद्धालु करते हैं तथा नियमित जाप व पाठ करने वाले साधकों के आसन पर इसी मार्ग में एकांत में निकलने वाले भक्तगणों से अलग हटकर एकांत में विराजमान रहते हैं ।

अखण्ड ज्योति दर्षन
सनातन हिन्दूधर्म संस्कृति के अनुरूप अखण्ड ज्योति निज मंदिर में वर्शो से प्रज्जवलित है । अखण्ड ज्योति के आभा मण्डल के दर्षन मात्र से गर्भगृह में श्रृद्धालुओं को नियमित मानसिक षांति का अनुभव होता हैं ।

षिव के नंदीष्वर विषाल त्रिषूल डमरू दर्षन
श्री अचलेष्वर महादेव मंदिर के पष्चिमी द्वार के सम्मुख ष्यामवर्ण के श्री नंदीष्वर विराजमान है । वहीं पूर्व द्वारा के ठी सामने विषाल यज्ञषाला जिसमें प्रति सोमवार को प्रातः 7बजे से 9 बजे तक राश्ट्र एवं नगर की समृद्धि खुषहाली पर्यावरण संतुलन व प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा हेतु तथा विष्व कल्याण के निमित्त प्रार्थना के साथ षुक्ल यजुर्वेदीय रूद्रमहायज्ञ की ऋचाओं से हवन यज्ञ आहुतियाॅं विधिविधान के साथ सम्पन्न होती है । जिस किसी को इस यज्ञ में परिवार सहित भाग लेना हो तो सोमवार से पूर्व मंदिर कार्यालय में पंजीयन करा सकते है तथा पूर्णाहुति में कोई भी भक्त श्रृद्धालु बिना पंजीयन के भाग ले सकता है । मंदिर के समीप ही एक विषाल मंदिर भवन में श्री रामदरबार की मनमोहक सिंहासन पर प्रतिमाओं के दर्षन सम्मुख ही होते है जिसमें राम लक्ष्मण जानकी एवं भरत षत्रुधन एवं उनके प्रिय भक्त हनुमानजी भी विराजमान हैं ।

इसी भवन में श्री राधाकृश्ण मंदिर, दुर्गा मंदिर, रिद्धी सिद्धी सहित श्री गणेष मंदिर, श्री हनुमान जी का मंदिर विराजमान स्थापित है । जिसमें बैठकर प्रति मंगलवार एवं सुन्दर कांड का पाठ होता है तथा नियमित सेवापूजा आरतीभी श्री अचलनाथ महादेव के आरती के साथ सम्पन्न होती है।

नटराज सभागृह
मंदिर के पीछे स्थित विषाल नटराज सभगृह में नटराज षिव की नृत्य करती हुई विषाल प्रतिमा स्थापित है इसमें कथा आयोजन प्रवचन सत्संग कीर्तन आदि दैवीक कार्या का आयोजन होता है।

इसी नटराज सभागृह में समय समय पर निःषुल्क मेडीकल कैम्प में समस्त रोगों के चिकित्सक अपनी निःषुल्क देकर मरीजों का चैकअप तथा आवष्यक जीवनदायनी दवाओं का निःषुल्क वितरण कर मंदिर में अपनी सेवाऐ प्रदान करते है।

आकस्मिक चिकित्सा कक्ष ओ.पी.डी.
नटराज सभागृह के ठीक सामने बाबा भैरोनाथ का मंदिर विराजमान है। भेैरोनाथ मंदिर के समीप ही अतिषीघ्र ओपीडी मेडीकल कार्यालय बनाया जा रहा है जहाॅं नियमित चिकित्सक अपनी निःषुल्क सेवाऐं प्रदान करेंगे ।

दैनिक भण्डारा महाप्रसादी
एक व्यक्ति जो 1000 व्यक्तियों को फाईव स्टार होटल में भोजन पार्टी देने की क्षमता रखता है वही व्यक्ति इस बाबा अचल नाथ के दरबार में अहंकार लम्बी कतार में खड़ा होकर प्रसाद की पूड़ी व रामभाजे को प्राप्त कर अपने आपको धन्य समझता है। नियमि दैनिक भण्डारा महाप्रसादी मंदिर प्रांगण में सैकड़ो श्रृद्धालु ग्रहण करते हैं ।

ग्वालियर नगर के अंघाश्रम, अनाथालय, मर्सी हाउस, कुश्ठाश्रम जैसी संस्थाओं को समय समय पर जरूरत अनुसार मंदिर से भोजन प्रसाद पहुॅंचाई जाती है । हाल ही में कुछ दिन पूर्व सड़क दुर्धटना में मृत माता पिता की चार बच्चीयों को न्यास द्वारा गोद लिया गया है । जिनकी षिक्षा दीक्षा एवं रहन सहन भोजन आदि व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी न्यास ने ग्रहण की है । इसप्रकार के कार्य अनवरत मंदिर न्यास द्वारा संचालित रहेंगे इसकी व्यवस्था का प्रावधान रखा जायेगा जिसमे अनाथ असहाय कन्याओं को अचलेष्वर न्यास द्वारा गोद लिया जाना उनकी षिक्षा,भोजन तथा विवाह आदि कार्यक्रम मंदिर के फण्ड से चलाये जाते हैं ।

भस्मी तिलक, पंचमेवा प्रसादी व कलावा कक्ष
उज्जेैन के महाकाल मंदिर की तरह श्री अचलेष्वर मंदिर पर भी 20/- रूपये भेंट देकर पंचमेवा प्रसाद, भस्मी तिलक, व कलावा पैकेट प्राप्त कर सकते है ।

लाल टिपारा गौषाला सहित अन्य गौषाला में न्यास का सहयोग
मुरार स्थित लाल टिपारा गौषाला की दयनीय स्थिति को चुस्त दुरूस्त व गौवंष को सुरक्षित करने में श्री अचलेष्वर मंदिर न्यास का भी पूर्ण सहयोग रहा है । न्यास द्वारा पूरे नगर को घ्वनिविस्तारक यंत्र के माध्यम से जनजाग्रति अभियान चलाकर गौषाला के प्रति जागरूकता पैदा की गई जिसका परिणाम लाल टिपारा गौषाला में गौ संरक्षण, सेवा व्यवस्था को देखा जा सकता है।